Monday, 13 November 2017

बैठे ठाले बस यूँ ही फालतू में...
           -1-
हर शख्स को एक दीवाना नज़र आता हूँ मैं
हर लौ को बस एक परवाना नज़र आता हूँ मैं
जब पी लेता हूँ छक कर तेरी आँखों की मय
हर पीने वाले को मयख़ाना नज़र आता हूँ मैं।

             -2-

मय में आँखों से क्या मिला दिया तूने साक़ी
ये नशा है कि अब कमबख्त़ उतरता ही नही
तेरी आँखों की कसम ऐ ख़ुदा-ए-मोहब्बत
तेरे बाद कोई और नशा मुझको चढ़ता ही नही।